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धर्म

साई बाबा जी के करीब जाने के कुछ रास्ते

सुबह सुबह अपने निवास पर भजन जरूर लगाय
🔔किसी एक गरीब को भोजन जरूर करवाये
🔔साई प्रतिमा या तस्वीर के समक्ष खड़े हो कर अपनी प्रार्थना करे। साई का वचन है की जो मेरी तस्वीर की और देखता है मै उसकी और देखता हु
🔔जानवरो को भोजन डाले साई का वचन है की जो जीव जंतु पर कृपा करता हैं मै उस पर कृपा किया करता हु।
🔔अपीने निवास पर साई की ज्योत जरूर जलाये ज्योत जल कर साई से सुख शांति की दात मांगे
🔔जब भी समय मिले चलते काम करते साई साई का जाप मुह मई करते रहे समरण रखे की आपके साई आपके साथ है। शुरू शुरू मे जाप करना पड़ेगा फिर अपने    आप चलने लगेगा। मेरे ब्रिज मोहन सूरी द्वारा लिखे साई गीता सार नामक ग्रन्थ मे इसकी पूर्ण जानकारी हैं।
🔔 अपने निवास पर भोजन पूर्ण प्रेम भगति के साथ तयार कर साई को भोग लगाये इससे भोजन मे शक्ति आ जायगी
🔔यदि आपसे कोई क्षमा मांगे तो माफ़ कर दे क्यूंकि साई जी का वचन है की तू मेरे बन्दों को माफ़ करके तो देख मै तेरी सारी भूले तेरे माफी मांगने से पहलेे माफ़       न कर दू तो कहना
🔔रात को बिस्तर पर साई साई नाम की माला का जाप कर पूरे दिन को याद करे आपको आपकी साडी गलतियो का अहसास होगा।
🔔किसी पर गुस्सा करने से पहले समरण करे की कही सामने वाले मे साई जी ही ना हो क्यूंकि साई बाबा का कहना है की मै तेरे पास किसी भी रूप मे आ सकता हु
    जय साई राम

11 May, 2016

तृतीया और चतुर्थी का शुभ संयोग कल, भगवती कूष्माण्डा की उपासना-आराधना का विधान है. इस विधि से करें मां की अराधना, नोट कर लें पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, आरती और मां का भोग
मां के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा और चतुर्थी तिथि पर मां के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्माण्डा की पूजा- अर्चना की जाती है।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है जाने पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती और कथा
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को अपने कार्य में सदैव विजय प्राप्त होता है
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र।
मा शैलपुत्री नाम शैलपुत्री कैसे पडा जाने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा
ऋषि पंच ऋषि पंचमी का व्रत पापों का नाश करने वाला व श्रेष्ठ फलदायी है
सभी महिलाएं व कन्याएं पूरी श्रद्धा भ्क्ति के साथ करना चाहिये । आज के दिन सप्तऋषियों का पूर्ण विधि-विधान से पूजन कर कथा श्रवण करने का महत्व है।
एक ऐसा मंदिर जहां प्रतिमा ही नहीं है , फिर भी लकवे की बीमारठीक होती है और दर्शन करने वालों का लगता है तांता
मान्याता है कि यहां सात दिन व सात रातों तक नियमित रूप से आरती एवं परिक्रमा करने एवं तत्प श्चासत भभूत ग्रहण करने से मरीजों की परेशानी दूर हो जाती है ।