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धर्म

एक ऐसा मंदिर जहां प्रतिमा ही नहीं है , फिर भी लकवे की बीमारठीक होती है और दर्शन करने वालों का लगता है तांता

भारतवर्ष एक तपोभुमि है जहा अनेको अनेक संत और सिध्द पुरूष हुऐ है । जिनके चमत्कार आज भी उनके नाम से देखने को मिलते है.। देश मै ऐसा ही एक ऐसा भी मंदिर है जहा आज भी चमत्कार देखने को मिलते है और वहा दर्शनार्थी तो खूब उमड़ते हैं । .लेकिन यह मंदिर जिनके नाम पर बना है, उनकी प्रतिमा ही मंदिर में स्थानपित नहीं है । इसके पीछे की वजह कोई विवाद या दोष नहीं , बल्कि केवल अनुपलब्धेता है । यह प्रसिद्ध मंदिर है बुटाटी धाम जो कि राजस्थातन के नागौर जिले के कुचेरा कस्बेी में स्थित है, यह मंदिर संत चतुरदास जी महाराज के समाधि स्थ ल पर बना है। मंदिर में सुबह और शाम के समय उमड़ने वाली भक्तों की भारी भीड़ और भव्यह मंदिर परिसर को देखकर यह अंदाज लगाना मुश्किल है कि यहां आस्थाऔ का जो मूल केंद्र है , उसकी प्रतिमा नहीं है। यहां केवल संत चतुरदास जी के सांकेतिक पैरों के निशान हैं। राजस्थाान में पैरों के निशान को पगलिया कहा जाता है। उसी को आराध्यं मानकर श्रद्धालु आरती एवं कामना करते हैं। राजस्था न में रामस्नेाही और दादूदयाल पंथ के अनुयायियों की संख्या् अच्छीथ खासी है। इस पंथ में मूर्ति पूजा की मान्य ता है।
इसका कारण यह है :----
बुटाटी धाम मंदिर समिती के अध्यूक्ष के कहे अनुसार , जिन चतुरदासजी महाराज के नाम पर यह मंदिर बना है , ऐसा माना जाता हैकि इसकी स्थापना 1600 ई.सी. मै बुरालाल जी शर्मा ने की थी भौम सिह जी ने इसपर अपना अधित्पय जमा लिया और बाद मै इसे भौम सिह की बटाटी कहा जाने लगा । आज से करीब 600 साल पहले संत चतुरदास जी महाराज रहा करते थे और वे लकवे की बीमार को ठिक करता थे । इस कारण उनकी कोई भी झलक अब तक उपलब्धक नहीं है । ऐसा नहीं है कि किसी ने प्रतिमा स्थाकपना के प्रयास नहीं किए लेकिन वह काल्प निक ही होती। लोगों के आग्रह के बावजूद यहां संत की प्रतिमा आकार नहीं ले सकी।
बुटाटी धाम मंदिर , राजस्थाआन के नागौर जिले की डेगाना तहसील के कुचेरा कस्बें में है। नागोर से करीब 50 कि.मी ,मेड़ता से 35 कि.मी.तथा बीकानेर से करीब 175 कि.मी. दूर स्थित है।
यह एक प्राचीन मंदिर है। यहां सामान्यम मंदिरों की तुलना में अलग दृश्यह देखने को मिलता है। असल में , यह मंदिर पैरालिसिस यानी लकवे के मरीजों के लिए है। मान्य।ता है कि यहां सात दिन व सात रातों तक नियमित रूप से आरती एवं परिक्रमा करने एवं तत्पैश्चातत भभूत ग्रहण करने से लकवे के मरीजों की परेशानी दूर हो जाती है। जनआस्थात के चलते प्रतिदिन यहां देश भर से मरीजों का तांता लगा रहता है।

05 September, 2021

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