
जीआईएस के 30 प्रतिशत से अधिक निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरे
इंदौर, 23 अक्टूबर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि समिट के माध्यम से प्रदेश को लगभग 5,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश को देश का प्रमुख सेमीकंडक्टर एवं तकनीकी केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा फोटोनिक्स एवं क्वांटम टेक्नोलॉजीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इंदौर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर में भी हाईटेक उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
समिट में 12 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें हुईं। इसके अलावा पांच कंपनियों को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन के आशय पत्र दिए गए, जिनसे 9,625 करोड़ रुपये के निवेश और 4,450 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार प्रस्तावित हैं। वहीं, सात कंपनियों को इंदौर के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स में कार्यालयीन स्थान के आशय पत्र प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 25 से अधिक नीतियों के माध्यम से निवेश और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन दिया गया है। समिट में चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और कौशल विकास पर चर्चा के साथ पांच प्रमुख संस्थानों के साथ एमओयू भी किए गए। आयोजन में देश-विदेश के एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं
सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना: प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से चिप डिजाइन, वीएलएसआई, नवाचार, अनुसंधान एवं विकास, प्रोटोटाइपिंग तथा कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
फोटोनिक्स एवं क्वांटम टेक्नोलॉजीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: प्रदेश में फोटोनिक्स एवं क्वांटम टेक्नोलॉजीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इससे क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, फोटोनिक्स, एडवांस्ड मटेरियल्स और डीप-टेक अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी।
इंदौर–उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर में हाई-टेक उद्योगों को प्राथमिकता: कॉरिडोर के विकास में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिप डिजाइन एवं हाई-टेक उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे प्रदेश में उन्नत प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार को गति मिलेगी।